श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा
( एक रचनात्मक गोसेवा महाभियान )
श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की स्थापना से लेकर आज तक गोभक्तों द्वारा कसाइयों से मुक्त करवाये हुए, दुर्घटनाग्रस्त, असहाय एवं निराश्रित तथा भयंकर अकाल से पीड़ित गोवंश को श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा पश्चिम राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखन्ड व पंजाब में स्थापित व संचालित गोसेवाश्रमों एवं वेदलक्षणा गोग्राम सेवा समितियों के माध्यम से गोसंरक्षण शिविरों में आश्रय और आहार प्रदान किया गया। इन गोसेवाश्रमों में गोवंश की संख्या क्रमशः इस प्रकार रही है- सन् 1993 में 8 गोमाताओं सहित 24 गोवंश से शुभारम्भ, सन् 1999 में 90,000, सन् 2001 में 1,76,000, सन् 2002 में 2,15,000, सन् 2003 में 2,84,000, सन् 2004 में सुवृष्टि के कारण दूध देने योग्य व कृषि उपयोगी 1,54,000 गोवंश का निशुल्क वितरण गोपालक किसानों में किया गया, शेष 1,30,000 गोवंश गोशालाओं में विद्यमान रहा। सन् 2005 में पुनः 33 हजार स्वस्थ गोवंश निशुल्क गोपालक किसानों को वितरित किया गया, उसके बाद असक्त, वृद्ध, बीमार, विकलांग, दुर्घटनाग्रस्त आदि 97,000 गोवंश सेवा में रहा। सन् 2009 में 72000 गोवंश, सन् 2010 में 2,00,000 गोवंश, सन् 2011 में 1,25,000 गोवंश, सन् 2012 में 1,22,000 गोवंश, 2013 में 1,27,000 गोवंश, 2015 में 1,24,000 गोवंश, 2016 में 1,27000 गोवंश, 2017 में 1,22,000 गोवंश सेवित रहा। सन् 2026 में श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के प्रत्यक्ष संचालन में करीब 73,500 गोवंश तथा श्री गोधाम पथमेड़ा के कार्यकर्ताओं के सहयोग व पूज्य संतों की प्रेरणा से संचालित गोसेवाश्रमों में लगभग 84,000 गोवंश सहित कुल 1,57,000 से अधिक असहाय निराश्रित वेदलक्षणा गोवंश की श्री गोधाम पथमेड़ा के मार्गदर्शन व सहयोग से संचालित गोशालाओं एवं वेदलक्षणा गोग्राम सेवा समितियों के माध्यम से सेवा सुश्रुषा हो रही है। इसके अतिरिक्त श्री गोधाम पथमेड़ा की प्रेरणा से गठित राजस्थान गोसेवा समिति द्वारा सम्पूर्ण राजस्थान प्रदेश में स्थापित सैकड़ों गोशालाओं एवं लाखों गोपालकों को समय-समय पर यथावश्यक संरक्षण, सहयोग, मार्गदर्शन तथा प्रोत्साहन देने का प्रयास किया जाता रहा है।