वेदलक्षणा गोसरक्षण अभियान

     श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा की स्थापना का मूल उद्देश्य अखिल वेदलक्षणा गोवंश संरक्षण हैं अर्थात् अंध स्वार्थता, हृदयहीनता से ग्रस्त मानवजाति द्वारा उपेक्षित, तिरस्कृत, प्रताड़ित, असहाय, निराश्रित, भूख-प्यास से व्याकुल, असाध्य रोगों एवं दुर्घटनाओं से ग्रस्त तथा गोघातियों से पीड़ित गोवंश को सम्पूर्ण रूप से संरक्षण प्रदान करना ही है। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा द्वारा प्रायोजित वेदलक्षणा गोसेवा महानुष्ठान में सर्वप्रथम उपरोक्त गोवंश संरक्षण हेतु आश्रय स्थान का चयन, निर्माण एवं गोसेवकों तथा गोसेवा सामग्री का प्रबन्ध किया जाता है। इसके अन्तर्गत राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखन्ड व पंजाब क्षेत्र में गोसेवाश्रमों तथा अन्य अस्थाई गोसेवा केन्द्रों पर हजारों की संख्या में वेदलक्षणा गोवंश जो अत्यन्त कुपोषित, अपंग, असाध्य रोगों से पीड़ित, दुर्घटनाग्रस्त तथा अतिवृद्ध नर-मादा आदि की सेवा संस्था के मार्गदर्शन व सहयोग से की जा रही है |

वेदलक्षणा गोसम्पोषण

     समाज में गोपालन विद्या के अभाव में गोभूमियों पर अतिक्रमण एवं बार-बार अनावृष्टि से पड़ने वाले दुष्कालों से अनेक प्रकार की पौष्टिक घासों का लुप्त हो जाना आदि कारणों से कुपोषित, बीमार गोवंश को स्वस्थ व सम्पोषित करने हेतु श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा प्रेरित राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखन्ड एंव पंजाब राज्यो के 64 से अधिक गोसेवाश्रमों में सर्वप्रथम विधिवत् उपचार के साथ उनको सुपाच्य व पौष्टिक आहार में ज्वार, जई, रजका, जौ, मकई, नेपियर, धामण, जेजवा, सेवण आदि हरा चारा तथा ज्वार, बाजरा, चावल की कुट्टी, ग्वार, मूंगफली, मसूर, गेंहूँ, जौ आदि का सूखा चारा और जौ, गेंहूँ, बाजरा, ज्वार, ग्वार आदि का अन्न व कपास, तिल, मूंगफली, खोपरा आदि खल, गुड़ व नमक भोजन में प्रदान करते हैं जिससे गोवंश सम्पूर्ण रूप से सम्पोषित हो जाता है।

     उपरोक्त विधि से श्री गोधाम पथमेड़ा प्रेरित श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला पथमेड़ा, श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ नन्दगांव, श्री महावीर हनुमान नन्दीशाला गोलासन, श्री खेतेश्वर गोशालाश्रम खिरोड़ी, श्री ठाकुर गोशालाश्रम पालड़ी तथा श्री रामराजा गोशालाश्रम टेटोड़ा सहित राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखन्ड तथा गुजरात के कई गांवो में स्थापित व संचालित गोसेवाश्रमों में वेदलक्षणा गोवंश का पालन पोषण करके प्रतिवर्ष 10-12 हजार संवर्धित गोवंश तैयार किया जाता है। इनमें से विभिन्न गो प्रजातियों का चयन करके वर्गीकरण किया जाता है।

     श्री गोधाम पथमेड़ा इन सम्पोषित व वर्गीकृत बछड़ियों को संवर्धन हेतु प्रदेश तथा देश के विभिन्न गोशालाओं, गोपालक किसानों तथा गोसेवाश्रमों को आजीवन संरक्षण की शर्त पर निःशुल्क वितरित करता है साथ ही राजस्थान व गुजरात के 800 गाँवों में गोपालक किसानों को प्रोत्साहित कर गोसम्पोषण कार्यक्रम को प्रदेश तथा राष्ट्रव्यापी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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